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एंबुलेंस बनी शराब का ठिकाना, छत में छिपा मिला जखीरा

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बिहार के हाजीपुर में शराब तस्करों ने एंबुलेंस की छत में गुप्त तहखाना बनाकर तस्करी का नया तरीका अपनाया। पुलिस ने कार्रवाई कर 1500 बोतल विदेशी शराब बरामद की है।

हाजीपुर/आलम की खबर:बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बीच तस्करी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं, लेकिन हाजीपुर से सामने आया मामला पुलिस के लिए भी हैरान कर देने वाला साबित हुआ। यहां तस्करों ने इंसानियत की सबसे जरूरी सेवा मानी जाने वाली एंबुलेंस को ही शराब ढोने का जरिया बना लिया। इतना ही नहीं, इस एंबुलेंस की छत को इस तरह से तैयार किया गया था कि बाहर से देखने पर किसी को शक तक नहीं हो सके, जबकि भीतर बड़ी मात्रा में शराब छिपाकर रखी गई थी। सदर थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि तस्कर कानून से बचने के लिए किस हद तक जा सकते हैं और किस तरह से नई-नई तरकीबें अपनाई जा रही हैं।

गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने देर शाम एक संदिग्ध एंबुलेंस को रोका। पहली नजर में सब कुछ सामान्य लगा और वाहन पूरी तरह एक साधारण एंबुलेंस की तरह दिखाई दे रहा था। लेकिन पुलिस को पहले से मिली जानकारी के आधार पर जब वाहन की बारीकी से जांच शुरू की गई, तो धीरे-धीरे पूरा राज खुलने लगा। एंबुलेंस की छत की बनावट सामान्य से अलग दिखी, जिसके बाद उसे खोलकर देखा गया तो अंदर का दृश्य चौंकाने वाला था। छत के भीतर विशेष रूप से तैयार किए गए गुप्त हिस्से में शराब की बड़ी खेप छिपाकर रखी गई थी।

छत में बना था पूरा ‘तहखाना’

तलाशी के दौरान पुलिस को एंबुलेंस के ऊपरी हिस्से में ऐसा केबिन मिला, जिसे बेहद चालाकी से तैयार किया गया था। इस गुप्त जगह में करीब 1500 बोतल विदेशी शराब रखी गई थी। इतना ही नहीं, वाहन के निचले हिस्से में भी अतिरिक्त जगह बनाकर शराब छिपाने की व्यवस्था की गई थी। पूरी गाड़ी को इस तरह डिजाइन किया गया था कि चेकिंग के दौरान पुलिस को कोई संदेह न हो और आसानी से शराब को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सके।

जांच के दौरान सामने आया कि कुल मिलाकर सैकड़ों लीटर शराब इस एंबुलेंस में भरी हुई थी। यह मात्रा इस बात का संकेत देती है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो लंबे समय से सक्रिय रहा होगा।

पुलिस भी रह गई हैरान

इस पूरी कार्रवाई को लेकर अधिकारियों ने भी आश्चर्य जताया है। जांच टीम के अनुसार, जिस तरह से एंबुलेंस की छत को काटकर उसमें गुप्त तहखाना बनाया गया था, वह बेहद पेशेवर तरीके से किया गया काम है। इससे साफ है कि इसमें तकनीकी समझ रखने वाले लोगों की भी भूमिका रही होगी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की तस्करी न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण भी है। एंबुलेंस जैसी गाड़ी का इस्तेमाल इस तरह के अवैध काम के लिए किया जाना समाज के लिए चिंताजनक संकेत माना जा रहा है।

चालक फरार, मालिक की तलाश तेज

कार्रवाई के दौरान एंबुलेंस का चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया है और उसके आधार पर आगे की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में गाड़ी के पंजीकरण से जुड़े व्यक्ति की पहचान सामने आई है, जिसके आधार पर अब पुलिस छापेमारी कर रही है।

अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे मामले में केवल चालक या वाहन मालिक ही नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह शामिल हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शराब कहां से लाई जा रही थी और किन-किन स्थानों पर इसकी आपूर्ति की जा रही थी।

निष्कर्ष

हाजीपुर में सामने आया यह मामला बिहार में शराबबंदी के बीच तस्करी के बदलते तरीकों की एक गंभीर तस्वीर पेश करता है। तस्कर अब ऐसे साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन पर आमतौर पर किसी को शक नहीं होता। ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती और भी बढ़ गई है। फिलहाल इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि आखिर इस तरह के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए और कितनी सख्ती की जरूरत है।

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